भारत का पहला अंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल: असम में ₹18,662 करोड़ की ऐतिहासिक परियोजना, बदलेगी पूरे पूर्वोत्तर की तस्वीर

भारत ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने पहले अंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल को मंजूरी दे दी है। यह विशाल परियोजना असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनाई जाएगी और गोपुर को नुमालीगढ़ से जोड़ेगी। इस पूरे कॉरिडोर की लागत ₹18,662 करोड़ है।

यह परियोजना न केवल यात्रा का समय कम करेगी, बल्कि माल ढुलाई को सस्ता बनाएगी, क्षेत्रीय व्यापार को गति देगी और लगभग 80 लाख व्यक्ति-दिवस का रोजगार भी पैदा करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूर्वोत्तर भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

भारत का पहला अंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल: असम में ₹18,662 करोड़ की ऐतिहासिक परियोजना, बदलेगी पूरे पूर्वोत्तर की तस्वीर

भारत के लिए क्यों है यह परियोजना ऐतिहासिक?

यह भारत का पहला ऐसा टनल प्रोजेक्ट होगा जिसमें सड़क और रेलवे दोनों एक ही अंडरवॉटर टनल में होंगी। दुनिया भर में इस तरह की परियोजनाएँ बहुत कम हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह दुनिया की दूसरी ऐसी परियोजना होगी जहाँ नदी के नीचे सड़क और रेल दोनों एक साथ बनाई जा रही हैं।

ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल और तेज़ बहाव वाली नदी के नीचे टनल बनाना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है। बाढ़, तेज़ धारा और बदलती नदी-तल की मिट्टी के बावजूद, यह टनल सालभर भरोसेमंद कनेक्टिविटी देगी।


यात्रा और पर्यावरण – दोनों को फायदा

वर्तमान में नुमालीगढ़ से गोपुर की दूरी लगभग 240 किलोमीटर है, जिसे तय करने में करीब 6 घंटे लगते हैं। यह रास्ता काजीरंगा नेशनल पार्क और बिस्वनाथ शहर से होकर गुजरता है, जो पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र हैं।

नई अंडरवॉटर कॉरिडोर से:

  • यात्रा का समय काफी कम होगा

  • काजीरंगा जैसे संरक्षित क्षेत्रों पर दबाव घटेगा

  • ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में कमी आएगी

इस तरह यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाती है।


सिर्फ टनल नहीं, एक मल्टी-मॉडल कॉरिडोर

यह अंडरवॉटर टनल एक चार-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का हिस्सा है, जो NH-15 (गोपुर) को NH-715 (नुमालीगढ़) से जोड़ेगा। इसकी खास बात है इसका मल्टी-मॉडल डिजाइन, जिसमें सड़क, रेल, हवाई और जल परिवहन को जोड़ा गया है।

प्रमुख कनेक्टिविटी विशेषताएँ:

  • 11 आर्थिक केंद्रों से जुड़ाव

  • 3 सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर नोड्स

  • 2 पर्यटन केंद्र

  • 8 लॉजिस्टिक्स हब

  • 4 प्रमुख रेलवे स्टेशन

  • 2 हवाई अड्डे

  • 2 इनलैंड वॉटरवे

इस नेटवर्क से माल और यात्रियों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक तेज़ और सुगम होगी।


पूरे पूर्वोत्तर को मिलेगा लाभ

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से केवल असम ही नहीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से कठिन भू-भाग और कमजोर कनेक्टिविटी की समस्या से जूझता रहा है। यह टनल:

  • कृषि उत्पादों

  • पेट्रोलियम और रिफाइनरी उत्पादों

  • औद्योगिक सामान

  • पर्यटकों और यात्रियों

की आवाजाही को तेज़ करेगी और राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में मदद करेगी।


तकनीकी और वित्तीय विवरण

इस परियोजना को इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत मंजूरी दी गई है। इस मॉडल में डिजाइन से लेकर निर्माण तक की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है, जिससे गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित होती है।

परियोजना का संक्षिप्त विवरण

पैरामीटरविवरण
परियोजना प्रकारअंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल
नदीब्रह्मपुत्र
कुल लागत₹18,662 करोड़
टनल की लंबाई15.79 किमी
मौजूदा दूरी~240 किमी
वर्तमान यात्रा समय~6 घंटे
अनुमानित रोजगार~80 लाख व्यक्ति-दिवस

यह 15.79 किमी लंबी टनल पानी के दबाव, भूकंपीय गतिविधियों और नदी-तल की चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन की जाएगी।


रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास

इस परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य के दौरान और बाद में:

  • स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा

  • स्टील, सीमेंट, मशीनरी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा

  • नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होंगे

सरकार का अनुमान है कि लगभग 80 लाख व्यक्ति-दिवस का रोजगार सृजित होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व

रणनीतिक दृष्टि से भी यह टनल बेहद महत्वपूर्ण है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों में:

  • तेज़ आपूर्ति व्यवस्था

  • आपदा प्रबंधन में सुधार

  • प्रशासनिक पहुंच को मजबूत

करेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएँ भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति का अहम हिस्सा हैं।


असम और पूर्वोत्तर के लिए नया अध्याय

ब्रह्मपुत्र नदी वर्षों से असम के लिए जीवनरेखा भी रही है और चुनौती भी। यह अंडरवॉटर टनल उस चुनौती को अवसर में बदलने का प्रतीक है। यह परियोजना दिखाती है कि भारत अब जटिल और विश्व-स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा करने में सक्षम है।

जब यह टनल पूरी होगी, तब यह सिर्फ दूरी नहीं घटाएगी—
यह पूरे पूर्वोत्तर भारत को विकास, अवसर और समृद्धि से जोड़ने का रास्ता बनेगी।

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