FASTag काम नहीं कर रहा है तो क्या देना होगा दोगुना टोल? जानिए NHAI के नियम और कब लगेगा 25% अतिरिक्त शुल्क
भारत में नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए FASTag ने टोल भुगतान को काफी आसान बना दिया है। पहले टोल प्लाजा पर गाड़ी रोककर नकद पैसे देने पड़ते थे, लेकिन अब FASTag की मदद से टोल का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाता है। इससे समय की बचत होती है और टोल प्लाजा पर लंबी कतारों से भी राहत मिलती है।
हालांकि, कई बार सफर के दौरान FASTag काम करना बंद कर देता है। कभी टोल प्लाजा का स्कैनर टैग को पढ़ नहीं पाता, तो कभी तकनीकी खराबी के कारण भुगतान पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में वाहन चालकों के मन में सवाल उठता है कि अगर FASTag काम नहीं कर रहा है, तो क्या उन्हें दोगुना टोल देना पड़ेगा?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने टोल भुगतान से संबंधित नियम बनाए हैं। इनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना, यात्रियों को सुविधा देना और टोल प्लाजा पर होने वाली गड़बड़ियों को कम करना है। आइए समझते हैं कि FASTag काम नहीं करने पर टोल का भुगतान कैसे किया जा सकता है और किन परिस्थितियों में अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
FASTag काम नहीं करने पर क्या होता है?
FASTag रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह टैग वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। जब वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचता है, तो स्कैनर टैग को पढ़ता है और उससे जुड़े खाते या वॉलेट से टोल की राशि काट ली जाती है।
लेकिन कभी-कभी यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं हो पाती। इसके कई कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, FASTag खराब हो सकता है, गलत तरीके से लगा हो सकता है, खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं हो सकता या टोल प्लाजा के स्कैनर में तकनीकी समस्या आ सकती है।
ऐसी स्थिति में टोल कर्मचारी वाहन चालक से किसी दूसरे तरीके से भुगतान करने के लिए कह सकते हैं। हालांकि, कितना शुल्क देना होगा, यह FASTag की स्थिति, भुगतान विफल होने के कारण और उस समय लागू नियमों पर निर्भर करता है।
इसलिए FASTag स्कैन नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि हर परिस्थिति में वाहन चालक को दोगुना टोल ही देना पड़ेगा।
FASTag काम नहीं करने पर कब देना पड़ सकता है 1.25 गुना टोल?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ निर्धारित परिस्थितियों में यदि टोल प्लाजा पर FASTag को पढ़ा नहीं जा सकता और वाहन चालक नकद के बजाय UPI या किसी अन्य स्वीकृत डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उसे सामान्य टोल का 1.25 गुना भुगतान करना पड़ सकता है।
इसका अर्थ है कि सामान्य टोल राशि पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
उदाहरण के लिए, यदि किसी टोल प्लाजा पर सामान्य टोल ₹100 है, तो 1.25 गुना दर के हिसाब से वाहन चालक को ₹125 देने होंगे।
इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करना और टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन को कम करना है। इससे उन वाहन चालकों को भी कुछ राहत मिल सकती है जो FASTag की तकनीकी समस्या के कारण भुगतान नहीं कर पाते, लेकिन UPI जैसे दूसरे डिजिटल माध्यम से भुगतान करने के लिए तैयार होते हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 1.25 गुना टोल का नियम FASTag से जुड़ी हर समस्या पर अपने आप लागू नहीं होता। इसका लाभ किन परिस्थितियों में मिलेगा, यह संबंधित सरकारी अधिसूचना और लागू निर्देशों पर निर्भर करता है।
किन परिस्थितियों में देना पड़ सकता है दोगुना टोल?
कुछ परिस्थितियों में वाहन चालकों से सामान्य टोल का दोगुना शुल्क वसूला जा सकता है। परंपरागत रूप से, वैध FASTag के बिना FASTag लेन में प्रवेश करने या लागू इलेक्ट्रॉनिक भुगतान नियमों का पालन नहीं करने पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रावधान रहे हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी वाहन में वैध FASTag नहीं है या टैग की स्थिति ऐसी है कि वह लागू नियमों के तहत भुगतान के लिए मान्य नहीं है, तो वाहन चालक को दोगुना टोल देना पड़ सकता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। वैध FASTag का तकनीकी कारणों से स्कैन नहीं होना और वाहन में वैध FASTag का न होना, दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं।
यदि टोल प्लाजा के स्कैनर में खराबी के कारण वैध FASTag काम नहीं कर रहा है, तो वाहन चालक की स्थिति उस व्यक्ति से अलग हो सकती है जिसके पास वैध FASTag नहीं है या जिसके टैग में बैलेंस की समस्या है।
यदि आपसे सामान्य टोल से अधिक राशि मांगी जाती है, तो कर्मचारी से अतिरिक्त शुल्क लगाने का कारण पूछें। भुगतान करने पर रसीद जरूर लें, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कराई जा सके।
UPI से भुगतान करने पर क्या फायदा होगा?
यदि FASTag काम नहीं कर रहा है, तो UPI जैसे डिजिटल भुगतान विकल्प उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि, भुगतान करने से पहले यह पुष्टि करना जरूरी है कि संबंधित टोल प्लाजा पर यह विकल्प उपलब्ध है और आपकी परिस्थिति में कौन-सी दर लागू होगी।
मान लीजिए कि सामान्य टोल ₹80 है। यदि 1.25 गुना दर लागू होती है, तो आपको ₹100 देने होंगे। वहीं, यदि किसी परिस्थिति में दोगुना टोल लागू होता है, तो राशि ₹160 होगी।
इन उदाहरणों से दोनों दरों के बीच का अंतर समझा जा सकता है। हालांकि, ये उदाहरण इस बात की गारंटी नहीं हैं कि हर FASTag समस्या में यही शुल्क लिया जाएगा।
भुगतान करने से पहले टोल कर्मचारी से राशि की पुष्टि करें। डिजिटल भुगतान करने पर ट्रांजैक्शन आईडी और रसीद सुरक्षित रखें, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में आपके पास भुगतान का प्रमाण हो।
टोल दिए बिना निकलने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
FASTag काम नहीं करने का मतलब यह नहीं है कि वाहन चालक बिना टोल चुकाए टोल प्लाजा पार कर सकता है। यदि भुगतान पूरा नहीं होता है, तो संबंधित नियमों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क या बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया लागू हो सकती है।
हालांकि, ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई होगी, यह परिस्थिति और लागू नियमों पर निर्भर करता है।
यह दावा कि टोल पार करने के बाद 72 घंटे के भीतर भुगतान नहीं करने पर हर स्थिति में दोगुना टोल लगाया जाएगा, संबंधित NHAI अधिसूचना से सत्यापित किया जाना चाहिए। वाहन चालकों को केवल सुनी-सुनाई जानकारी पर भरोसा करने के बजाय टोल कर्मचारी के निर्देशों का पालन करना चाहिए और अधिकृत माध्यम से भुगतान करना चाहिए।
यदि आपके खाते से पैसे कट गए हैं, लेकिन टोल प्लाजा पर भुगतान असफल दिखाया जा रहा है, तो दोबारा भुगतान करने से पहले ट्रांजैक्शन की स्थिति जांचें। जरूरत पड़ने पर टोल कर्मचारी या FASTag जारी करने वाले बैंक से संपर्क करें।
FASTag की समस्या से बचने के लिए क्या करें?
लंबी यात्रा पर निकलने से पहले FASTag का बैलेंस जांच लें। यह भी सुनिश्चित करें कि टैग सक्रिय है, सही तरीके से विंडस्क्रीन पर लगा हुआ है और उस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
यदि FASTag बार-बार काम नहीं कर रहा है या खराब हो गया है, तो उसे जारी करने वाले बैंक या अधिकृत सेवा प्रदाता से संपर्क करके बदलवाएं।
इसके अलावा, भुगतान से संबंधित SMS और खाते में होने वाले लेनदेन पर नजर रखें। यदि कोई समस्या दिखाई दे, तो टोल प्लाजा पहुंचने से पहले उसे ठीक कराने की कोशिश करें।
यदि आपको लगता है कि टोल प्लाजा पर गलत राशि वसूली गई है, तो भुगतान की रसीद, ट्रांजैक्शन आईडी और अन्य जरूरी जानकारी सुरक्षित रखें। इसके बाद NHAI या FASTag जारी करने वाले बैंक के आधिकारिक शिकायत माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
FASTag काम नहीं करने पर हर वाहन चालक को दोगुना टोल देना पड़े, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ निर्धारित परिस्थितियों में वैकल्पिक डिजिटल भुगतान पर अलग दर लागू हो सकती है, जिसमें सामान्य टोल का 1.25 गुना शुल्क भी शामिल हो सकता है। वहीं, कुछ अन्य परिस्थितियों में दोगुना टोल वसूला जा सकता है।
इसलिए सबसे जरूरी है कि FASTag के काम नहीं करने का कारण समझें, टोल कर्मचारी से लागू शुल्क की जानकारी लें और अधिकृत माध्यम से भुगतान करें।
ध्यान रखें: टोल के नियमों और निर्देशों में बदलाव हो सकता है। इसलिए 1.25 गुना शुल्क या 72 घंटे की समय-सीमा से जुड़ी जानकारी पर भरोसा करने से पहले NHAI की नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना जरूर जांचें।

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